LESSON - 2 थर्मोडायनेमिक्स Physics class 12 notes handwritten

                                                              

                                                              LESSON - 2

                                                             थर्मोडायनेमिक्स

थर्मोडायनेमिक्स (Thermodynamics) भौतिकी की एक शाखा है, जो ऊर्जा, ऊष्मा (heat), और कार्य (work) के बीच संबंधों का अध्ययन करती है। यह उन प्रक्रियाओं को समझने में मदद करती है, जिनमें ऊर्जा का स्थानांतरण और रूपांतरण होता है। थर्मोडायनेमिक्स का उपयोग प्राकृतिक घटनाओं, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं, और विभिन्न वैज्ञानिक अनुप्रयोगों को समझने के लिए किया जाता है।


थर्मोडायनेमिक्स की परिभाषा

थर्मोडायनेमिक्स वह विज्ञान है जो:

  1. ऊष्मा और कार्य के रूप में ऊर्जा के स्थानांतरण का अध्ययन करता है।
  2. ऊर्जा के विभिन्न रूपों (जैसे ऊष्मा, यांत्रिक, विद्युत, रासायनिक) के बीच परिवर्तन को समझता है।
  3. किसी प्रणाली (system) की अवस्था (state) और उसकी ऊष्मा-ऊर्जा की स्थिति का विश्लेषण करता है।

थर्मोडायनेमिक्स के मुख्य तत्व

  1. प्रणाली (System):

    • वह भाग जिसे अध्ययन के लिए चुना जाता है।
    • उदाहरण: इंजन, गैस का कंटेनर, आदि।
  2. परिवेश (Surroundings):

    • प्रणाली के बाहर का हिस्सा, जो प्रणाली से ऊष्मा या ऊर्जा का आदान-प्रदान कर सकता है।
  3. सीमा (Boundary):

    • प्रणाली और परिवेश को अलग करने वाली काल्पनिक या वास्तविक सीमा।
  4. ऊष्मा (Heat):

    • ऊर्जा का वह रूप जो तापमान में अंतर के कारण स्थानांतरित होता है।
  5. कार्य (Work):

    • ऊर्जा का वह रूप जो किसी बल के कारण वस्तु को विस्थापित करता है।

थर्मोडायनेमिक्स के नियम (Laws of Thermodynamics)

थर्मोडायनेमिक्स चार मुख्य नियमों पर आधारित है:

1. शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics):

  • यह नियम कहता है कि यदि दो प्रणालियाँ किसी तीसरी प्रणाली के साथ तापीय संतुलन (thermal equilibrium) में हैं, तो वे एक-दूसरे के साथ भी तापीय संतुलन में होंगी।
  • महत्व: तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है।

2. प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics):

  • ऊर्जा का संरक्षण का सिद्धांत: ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
  • गणितीय रूप: ΔU=QW\Delta U = Q - W
    • ΔU\Delta U: आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन
    • QQ: प्रणाली को दी गई ऊष्मा
    • WW: प्रणाली द्वारा किया गया कार्य

3. द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics):

  • यह नियम बताता है कि ऊष्मा हमेशा उच्च तापमान वाले क्षेत्र से निम्न तापमान वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
  • यह एंट्रॉपी (Entropy) की अवधारणा को भी परिभाषित करता है, जो किसी प्रणाली की अव्यवस्था (disorder) का माप है।
  • महत्व: यह ऊष्मा इंजनों और ऊर्जा के व्यावहारिक उपयोग को समझने में मदद करता है।

4. तृतीय नियम (Third Law of Thermodynamics):

  • यह नियम कहता है कि किसी आदर्श क्रिस्टल (perfect crystal) में, शून्य केल्विन (0K0 \, K) तापमान पर एंट्रॉपी न्यूनतम होती है।

थर्मोडायनेमिक्स के मुख्य प्रक्रियाएँ (Processes):

  1. आइसोथर्मल प्रक्रिया (Isothermal Process):

    • तापमान स्थिर रहता है (ΔT=0\Delta T = 0)।
    • ऊष्मा और कार्य का आदान-प्रदान होता है।
  2. एडियाबेटिक प्रक्रिया (Adiabatic Process):

    • कोई ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता (Q=0Q = 0)।
    • कार्य और आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है।
  3. आइसोकोरिक प्रक्रिया (Isochoric Process):

    • आयतन स्थिर रहता है (ΔV=0\Delta V = 0)।
    • कोई कार्य नहीं होता।
  4. आइसोबारिक प्रक्रिया (Isobaric Process):

    • दबाव स्थिर रहता है (ΔP=0\Delta P = 0)।
    • ऊष्मा और कार्य का आदान-प्रदान होता है।

थर्मोडायनेमिक्स के अनुप्रयोग (Applications):

  1. ऊष्मा इंजन (Heat Engines):

    • जैसे कार का इंजन, जो ईंधन की ऊष्मा ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।
  2. रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर:

    • थर्मोडायनेमिक्स का उपयोग ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने में किया जाता है।
  3. ऊर्जा उत्पादन:

    • थर्मल पावर प्लांट, सोलर पैनल, और अन्य ऊर्जा उत्पादन प्रणालियाँ थर्मोडायनेमिक्स के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
  4. खगोलशास्त्र:

    • सितारों और ग्रहों के आंतरिक तापमान और ऊर्जा के अध्ययन में।

थर्मोडायनेमिक्स का महत्व:

  • यह प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझने और उनकी भविष्यवाणी करने में मदद करता है।
  • यह ऊर्जा के संरक्षण और उपयोग के व्यावहारिक तरीकों को विकसित करने में सहायक है।
  • यह उद्योगों, इंजीनियरिंग, और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनिवार्य है।                       

                                                                            उष्मा


      उष्मा (Heat) ऊर्जा का वह रूप है, जो किसी वस्तु से दूसरी वस्तु में उनके तापमान में अंतर के कारण स्थानांतरित होती है। यह ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है, जो किसी प्रणाली के तापमान को बढ़ाने या घटाने में मदद करती है।

उष्मा की परिभाषा

  • उष्मा वह ऊर्जा है, जो दो वस्तुओं के बीच तापमान के अंतर के कारण स्थानांतरित होती है।
  • यह हमेशा उच्च तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर प्रवाहित होती है।

उष्मा और तापमान में अंतर

  1. उष्मा (Heat):

    • यह ऊर्जा का वह रूप है, जो तापमान के अंतर के कारण स्थानांतरित होती है।
    • इसका मात्रक (Unit) जूल (Joule) है।
    • यह वस्तु के कुल ऊर्जा के रूप में मापी जाती है।
  2. तापमान (Temperature):

    • यह वस्तु की गर्मी या ठंडक का माप है।
    • इसका मात्रक केल्विन (Kelvin), डिग्री सेल्सियस (°C), या फारेनहाइट (°F) है।
    • यह किसी वस्तु के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा (average kinetic energy) को दर्शाता है।

उष्मा के प्रकार

  1. संवहन (Conduction):

    • उष्मा का स्थानांतरण ठोस पदार्थों के माध्यम से होता है।
    • उदाहरण: लोहे की छड़ को गर्म करने पर गर्मी का एक सिरे से दूसरे सिरे तक स्थानांतरण।
  2. संवहन (Convection):

    • उष्मा का स्थानांतरण द्रव (तरल या गैस) के माध्यम से होता है।
    • उदाहरण: पानी को गर्म करने पर गर्म पानी ऊपर और ठंडा पानी नीचे आना।
  3. विकिरण (Radiation):

    • उष्मा का स्थानांतरण बिना किसी माध्यम के होता है।
    • उदाहरण: सूर्य से पृथ्वी तक गर्मी का पहुंचना।

उष्मा के प्रभाव

  1. तापमान में वृद्धि:

    • उष्मा प्रदान करने से वस्तु का तापमान बढ़ता है।
  2. अवस्था में परिवर्तन:

    • उष्मा के कारण वस्तु ठोस, तरल, या गैस में बदल सकती है।
    • उदाहरण: बर्फ का पिघलना या पानी का भाप बनना।
  3. विस्तार (Expansion):

    • उष्मा प्रदान करने से वस्तु का आयतन बढ़ सकता है।
  4. रासायनिक परिवर्तन:

    • उष्मा के कारण रासायनिक अभिक्रियाएँ हो सकती हैं।

उष्मा का मापन

  1. गर्मी की मात्रा (Quantity of Heat):

    • इसे मापने के लिए कैलोरीमीटर (Calorimeter) का उपयोग किया जाता है।
  2. उष्मा का सूत्र:

    Q=mcΔTQ = mc\Delta T
    • QQ = उष्मा (जूल में)
    • mm = द्रव्यमान (किलोग्राम में)
    • cc = विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat Capacity)
    • ΔT\Delta T = तापमान में परिवर्तन

उष्मा का महत्व

  1. दैनिक जीवन में:

    • खाना पकाने, पानी गर्म करने, और अन्य कार्यों में उष्मा का उपयोग होता है।
  2. औद्योगिक क्षेत्र में:

    • उष्मा का उपयोग ऊर्जा उत्पादन, धातु गलाने, और औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
  3. प्राकृतिक प्रक्रियाओं में:

    • सूर्य से आने वाली उष्मा पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है।
  4. विज्ञान और इंजीनियरिंग में:

    • उष्मा का अध्ययन थर्मोडायनेमिक्स, इंजन डिजाइन, और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है।

उष्मा का ऊर्जा रूपांतरण में योगदान

  • उष्मा ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, और अन्य ऊर्जा रूपों में बदला जा सकता है।
  • उदाहरण: भाप इंजन, सोलर पैनल, और थर्मल पावर प्लांट।
                                                थर्मोडायनेमिक्स के नियम 

थर्मोडायनेमिक्स के नियम (Laws of Thermodynamics) ऊर्जा, ऊष्मा, और कार्य के बीच संबंधों को समझाने वाले मौलिक नियम हैं। ये नियम ऊर्जा के संरक्षण, स्थानांतरण, और ऊष्मा प्रवाह की दिशा को स्पष्ट करते हैं। इन नियमों का उपयोग भौतिक प्रक्रियाओं और यांत्रिक प्रणालियों के अध्ययन में किया जाता है।


थर्मोडायनेमिक्स के चार मुख्य नियम

थर्मोडायनेमिक्स के नियमों को चार भागों में विभाजित किया गया है:


1. शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics)

  • परिभाषा:
    यदि दो प्रणालियाँ किसी तीसरी प्रणाली के साथ तापीय संतुलन (thermal equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय संतुलन में होंगी।
  • महत्व:
    यह नियम तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है।
  • उदाहरण:
    यदि AA और BB दोनों CC के साथ संतुलन में हैं, तो AA और BB भी संतुलन में होंगे।

2. प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics)

  • परिभाषा:
    ऊर्जा का संरक्षण का सिद्धांत: ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
  • गणितीय रूप: ΔU=QW\Delta U = Q - W
    • ΔU\Delta U: प्रणाली की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन।
    • QQ: प्रणाली को दी गई ऊष्मा।
    • WW: प्रणाली द्वारा किया गया कार्य।
  • महत्व:
    यह नियम ऊर्जा के संरक्षण को समझने और ऊष्मा और कार्य के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।
  • उदाहरण:
    भाप इंजन में ऊष्मा ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है।

3. द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics)

  • परिभाषा:
    ऊष्मा हमेशा उच्च तापमान वाले क्षेत्र से निम्न तापमान वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
  • महत्व:
    यह नियम एंट्रॉपी (Entropy) की अवधारणा को परिभाषित करता है, जो किसी प्रणाली की अव्यवस्था (disorder) का माप है।
  • गणितीय रूप: ΔS0\Delta S \geq 0
    • ΔS\Delta S: एंट्रॉपी में परिवर्तन।
  • उदाहरण:
    रेफ्रिजरेटर में ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

4. तृतीय नियम (Third Law of Thermodynamics)

  • परिभाषा:
    किसी आदर्श क्रिस्टल (perfect crystal) में, शून्य केल्विन (0K0 \, K) तापमान पर एंट्रॉपी न्यूनतम होती है।
  • महत्व:
    यह नियम बताता है कि पूर्ण शून्य तापमान (0K0 \, K) प्राप्त करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
  • उदाहरण:
    किसी भी पदार्थ की एंट्रॉपी 0K0 \, K पर लगभग स्थिर हो जाती है।

थर्मोडायनेमिक्स के नियमों का महत्व

  1. ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धांत:

    • प्रथम नियम हमें ऊर्जा के संरक्षण और इसके रूपांतरण को समझने में मदद करता है।
  2. प्राकृतिक प्रक्रियाओं की दिशा:

    • द्वितीय नियम यह स्पष्ट करता है कि ऊष्मा प्रवाह की दिशा हमेशा एक निश्चित नियम का पालन करती है।
  3. तापमान और संतुलन:

    • शून्यवाँ नियम तापमान और संतुलन के बीच संबंध को परिभाषित करता है।
  4. अव्यवस्था और शीतलता का अध्ययन:

    • तृतीय नियम पदार्थों की एंट्रॉपी और पूर्ण शून्य तापमान के सिद्धांत को समझने में मदद करता है।

थर्मोडायनेमिक्स के नियमों के अनुप्रयोग

  1. ऊष्मा इंजन:

    • इंजन डिज़ाइन में ऊर्जा के रूपांतरण को समझने के लिए।
  2. रेफ्रिजरेशन:

    • रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर में ऊष्मा के प्रवाह को नियंत्रित करने में।
  3. ऊर्जा उत्पादन:

    • थर्मल पावर प्लांट में ऊर्जा को उपयोगी रूप में बदलने के लिए।
  4. रसायन और भौतिक विज्ञान:

    • रासायनिक अभिक्रियाओं और पदार्थों की अवस्थाओं का अध्ययन।

                                                                 एंट्रॉपी

एंट्रॉपी (Entropy) थर्मोडायनेमिक्स की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो किसी प्रणाली की अव्यवस्था (disorder) या अनिश्चितता (randomness) का माप है। यह बताती है कि किसी प्रक्रिया के दौरान ऊर्जा किस प्रकार उपयोगी (useful) से अनुपयोगी (unusable) रूप में परिवर्तित होती है।


एंट्रॉपी की परिभाषा

  • एंट्रॉपी वह भौतिक राशि है, जो यह मापती है कि किसी प्रणाली में कितनी अव्यवस्था या अनिश्चितता है।
  • इसे SS द्वारा दर्शाया जाता है और इसका मात्रक जूल प्रति केल्विन (J/KJ/K) है।

एंट्रॉपी का महत्व

  • एंट्रॉपी यह दर्शाती है कि ऊर्जा का एक हिस्सा हमेशा अनुपयोगी हो जाता है और इसे कार्य में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
  • यह प्राकृतिक प्रक्रियाओं की दिशा और उनके अंत की भविष्यवाणी करने में मदद करती है।

एंट्रॉपी का द्वितीय नियम से संबंध

  • थर्मोडायनेमिक्स का द्वितीय नियम कहता है कि किसी भी स्वाभाविक (spontaneous) प्रक्रिया में एक बंद प्रणाली की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है या स्थिर रहती है।
  • गणितीय रूप: ΔS0\Delta S \geq 0
    • ΔS\Delta S: एंट्रॉपी में परिवर्तन।
    • यह दर्शाता है कि एंट्रॉपी समय के साथ बढ़ती है।

एंट्रॉपी के उदाहरण

  1. आइसक्रीम का पिघलना:

    • ठोस अवस्था (कम अव्यवस्था) से तरल अवस्था (अधिक अव्यवस्था) में जाने पर एंट्रॉपी बढ़ती है।
  2. गैस का फैलना:

    • एक बंद कंटेनर में गैस के अणु अधिक स्थान में फैलते हैं, जिससे एंट्रॉपी बढ़ती है।
  3. जल का वाष्पीकरण:

    • तरल अवस्था से गैस अवस्था में जाने पर अणुओं की गति बढ़ती है, जिससे एंट्रॉपी बढ़ती है।

एंट्रॉपी का मापन

एंट्रॉपी में परिवर्तन का सूत्र:

ΔS=QT\Delta S = \frac{Q}{T}
  • ΔS\Delta S: एंट्रॉपी में परिवर्तन।
  • QQ: प्रणाली को दी गई या ली गई ऊष्मा।
  • TT: तापमान (केल्विन में)।

एंट्रॉपी के गुण

  1. एंट्रॉपी बढ़ती है:

    • स्वाभाविक प्रक्रियाओं में एंट्रॉपी बढ़ती है।
    • उदाहरण: गैस का फैलना, पदार्थ का वाष्पीकरण।
  2. एंट्रॉपी स्थिर रह सकती है:

    • यदि प्रक्रिया प्रतिवर्ती (reversible) हो, तो एंट्रॉपी स्थिर रहती है।
  3. एंट्रॉपी घट नहीं सकती:

    • किसी बंद प्रणाली में एंट्रॉपी स्वाभाविक रूप से घटती नहीं है।

एंट्रॉपी के अनुप्रयोग

  1. ऊष्मा इंजन:

    • यह बताती है कि इंजन की कार्य क्षमता क्यों सीमित होती है।
  2. रासायनिक अभिक्रियाएँ:

    • यह निर्धारित करती है कि कौन सी अभिक्रिया स्वाभाविक रूप से होगी।
  3. जानकारी का सिद्धांत (Information Theory):

    • एंट्रॉपी का उपयोग डेटा की अनिश्चितता को मापने के लिए किया जाता है।

निष्कर्ष

एंट्रॉपी ऊर्जा, अव्यवस्था, और अनिश्चितता का माप है। यह थर्मोडायनेमिक्स में प्रक्रियाओं की दिशा और उनकी दक्षता को समझने में मदद करती है। एंट्रॉपी का अध्ययन हमें यह समझने में सहायता करता है कि ऊर्जा का उपयोग कैसे किया जा सकता है और क्यों कुछ ऊर्जा हमेशा अनुपयोगी हो जाती है।


                                                         ऊष्मा इंजन

ऊष्मा इंजन (Heat Engine)

ऊष्मा इंजन एक ऐसी यांत्रिक प्रणाली है, जो ऊष्मा ऊर्जा को यांत्रिक कार्य (mechanical work) में परिवर्तित करती है। यह ऊर्जा रूपांतरण थर्मोडायनेमिक्स के सिद्धांतों पर आधारित होता है।


ऊष्मा इंजन की परिभाषा

ऊष्मा इंजन वह यंत्र है, जो उच्च तापमान के स्रोत (heat source) से ऊष्मा को ग्रहण करता है, इसका कुछ भाग यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करता है और बची हुई ऊष्मा को निम्न तापमान के स्रोत (heat sink) में स्थानांतरित कर देता है।


ऊष्मा इंजन का कार्य सिद्धांत

ऊष्मा इंजन मुख्यतः थर्मोडायनेमिक्स के प्रथम और द्वितीय नियम पर कार्य करता है:

  1. प्रथम नियम: ऊर्जा का संरक्षण।
  2. द्वितीय नियम: ऊर्जा प्रवाह की दिशा और एंट्रॉपी।

ऊष्मा इंजन के घटक

  1. ऊष्मा स्रोत (Heat Source):

    • उच्च तापमान पर ऊर्जा प्रदान करता है।
    • उदाहरण: बॉयलर, भाप।
  2. कार्यकारी पदार्थ (Working Substance):

    • वह माध्यम, जो ऊष्मा को कार्य में परिवर्तित करता है।
    • उदाहरण: भाप, गैस।
  3. ऊष्मा सिंक (Heat Sink):

    • वह स्थान, जहां बची हुई ऊष्मा का निष्कासन होता है।
    • उदाहरण: वातावरण, कंडेन्सर।
  4. कार्य निष्पादन यंत्र (Work Output Device):

    • वह यंत्र, जो यांत्रिक कार्य उत्पन्न करता है।
    • उदाहरण: पिस्टन, टरबाइन।

ऊष्मा इंजन का कार्य चक्र (Working Cycle)

ऊष्मा इंजन सामान्यतः एक चक्रीय प्रक्रिया पर कार्य करता है।

  1. ऊष्मा का अवशोषण (Heat Absorption):

    • उच्च ताप स्रोत से ऊष्मा ली जाती है।
  2. ऊष्मा का रूपांतरण (Heat Conversion):

    • कार्यकारी पदार्थ इस ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलता है।
  3. ऊष्मा का निष्कासन (Heat Rejection):

    • बची हुई ऊष्मा को निम्न ताप स्रोत में स्थानांतरित किया जाता है।

ऊष्मा इंजन की दक्षता (Efficiency)

ऊष्मा इंजन की दक्षता यह मापती है कि कितनी ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित किया गया।

η=WQ1=Q1Q2Q1\eta = \frac{W}{Q_1} = \frac{Q_1 - Q_2}{Q_1}
  • η\eta: दक्षता।
  • WW: उत्पन्न कार्य।
  • Q1Q_1: उच्च ताप स्रोत से ली गई ऊष्मा।
  • Q2Q_2: निम्न ताप स्रोत में निष्कासित ऊष्मा।

ऊष्मा इंजन के प्रकार

  1. आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine):

    • ऊष्मा का निर्माण इंजन के अंदर होता है।
    • उदाहरण: पेट्रोल इंजन, डीजल इंजन।
  2. बाहरी दहन इंजन (External Combustion Engine):

    • ऊष्मा का निर्माण इंजन के बाहर होता है।
    • उदाहरण: भाप इंजन।
  3. गैस टरबाइन इंजन (Gas Turbine Engine):

    • गैसों के विस्तार से कार्य उत्पन्न होता है।
    • उदाहरण: जेट इंजन।

ऊष्मा इंजन के अनुप्रयोग

  1. वाहनों में:

    • कार, ट्रक, ट्रेन, और हवाई जहाज।
  2. उद्योगों में:

    • विद्युत उत्पादन, मशीनरी संचालन।
  3. ऊर्जा संयंत्रों में:

    • थर्मल पावर प्लांट।

निष्कर्ष

ऊष्मा इंजन ऊर्जा रूपांतरण का एक अद्भुत यंत्र है, जो आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी दक्षता बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए निरंतर शोध किया जा रहा है


            LESSON - 3 👇👇👇👇👇👇👇👇

विद्युतचुम्बकत्व (Electromagnetism)

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